Wednesday, December 2, 2009

बारिश

हा मेरे दोस्त

वही बारिश

वही बारिश जो आसमान से आती है

बूंदों मैं गाती है

पहाड़ों से फिसलती है

नदियों मैं चलती है

नेहरों मैं मचलती है

कुवे पोखर से मिलती है

खाप्रेलो पर गिरती है

गलियों मैं फिरती है

मोड़ पर संभालती है

फिर आगे निकलती है

वही बारिश

ये बारिश अक्सर गीली होती है

इसे पानी भी कहते है

उर्दू मैं आप

मराठी मैं पानी

तमिळ मैं कन्नी

कन्नड़ मैं नीर

बंगला मैं… जोल केह्ते है

संस्क्रित मैं जिसे वारि नीर जीवन पै अमृत पै अम्बु भी केह्ते है

ग्रीक मैं इसे aqua pura

अंग्रेजी मैं इसे water

फ्रेंच मैं औ’

और केमिस्ट्री मैं H2O केह्ते है

ये पानी आँख से ढलता है तो आँसू कहलता है

लेकिन चेहरे पर चढ़ जाये तो रुबाब बन जाता है

हां…कोई शर्म से पानी पानी हो जाता है

और कभी कभी यह पानी सरकारी फ्य्लो मैं अपने कुए समेत चोरी हो जाता है

पानी तो पानी है पानी जिन्दगानी है

इसलिए जब रूह की नदी सुखी हो

और मन का हिरण प्यासा हो

दीमाग मैं लगी हो आग

और प्यार की घागर खाली हो

तब मैं….हमेशा

ये बारिश नाम का गीला पानी लेने की राय देता हूँ

मेरी मानिए तो ये बारिश खरिदेये

सस्ती सुन्दर टिकाऊ बारिश

सिर्फ 5 हज़ार रुपये मैं

इस्से कम मैं दे कोई तो चोर की सज़ा वो  मेरी

आपकी जुती सिर पर मेरी

मेरी बारिश खरीदये

सस्ती सुन्दर टिकाऊ बारिश

From The movie “Thodasa Roomani Ho Jaye”. Nana Patekar delivered the whole dialog in a single take.

[Via http://full2faltu.wordpress.com]

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